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Saturday, May 16, 2009

गुरु वाणी



  • उत्तम हे वह क्रोध
    जो दुष्टो का दलन करे !
    अच्छी हे वह ईर्ष्या
    जो प्रतिस्पर्धी का भाव भरे !
    अच्छा हे वह प्रतिकार
    जो आगे बढने को झकझोरे!
    अच्छी हे वह घ्रृर्णा
    जो दुष्कर्मों से बचाए !

  • परमपूज्य सुधांशुजी महाराज

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