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Saturday, May 30, 2009

Life is about correcting mistakes-must read it




Life is about correcting mistakes


Monica married Sanjay this day. At the end of the wedding party, Monica's mother gave her a newly opened bank saving passbook. With Rs.1000 deposit amount.
Mother: 'Monica, take this passbook. Keep it as a record of your marriage life. When there's something happy and memorable happened in your new life, put some money in. Write down what it's about next to the line.

The more memorable the event is, the more money you can put in. I've done the first one for you today. Do the others with Sanjay. When you look back after years, you can know how much happiness you've had.'

Monica shared this with Sanjay when getting home. They both thought it was a great idea and were anxious to know when the second deposit can be made.

This was what they did after certain time:
- 7 Feb: Rs.100, first birthday celebration for Sanjay after marriage
- 1 Mar: Rs.300, salary raise for Monica
- 20 Mar: Rs.200, vacation trip to Bali
- 15 Apr: Rs.2000, Monica got pregnant
- 1 Jun: Rs.1000, Sanjay got promoted
..... And so on...

However, after years, they started fighting and arguing for trivial things. They didn't talk much. They regretted that they had married the nastiest person in the world.... no more love...Kind of typical nowadays, huh?

One day Monica talked to her Mother:
'Mom, we can't stand it anymore. We agree to divorce. I can't imagine how I decided to marry this guy!!!'

Mother: 'Sure, girl, that's no big deal. Just do whatever you want if you really can't stand it. But before that, do one thing first. Remember the saving passbook I gave you on your wedding day? Take out all money and spend it first. You shouldn't keep any record of such a poor marriage.'

Monica thought it was true. So she went to the bank, waiting at the queue and planning to cancel the account.
While she was waiting, she took a look at the passbook record. She looked, and looked, and looked. Then the memory of all the previous joy and happiness just came up her mind. Her eyes were then filled with tears. She left and went home.

When she was home, she handed the passbook to Sanjay, asked him to spend the money before getting divorce.
The next day, Sanjay gave the passbook back to Monica. She found a new deposit of Rs.5000.
And a line next to the record: 'This is the day I notice how much I've loved you thru out all these years. How much happiness you've brought me.'

THEY HUGGED AND CRIED, PUTTING THE PASSBOOK BACK TO THE SAFE.
I DON'T KNOW HOW MUCH THEY SAVED .I BELIEVE THE MONEY DID NOT MATTER ANY MORE AFTER THEY HAD GONE THRU ALL THE GOOD YEARS IN THEIR LIFE.


"When you fall, in any way, don't see the place where you fell,

Instead see the place from where you slipped.
Life is about correcting mistakes."

FROM THE DESK OF YUVA KRANTI DAL

भक्ति





  • आसक्ति और मोह का परित्याग ही भक्ति का द्वार है ! जब तक व्यक्ति मोह का परित्याग नहीं करता तब तक भक्ति का पाठ नहीं सीखता !
  • परमपूज्य सुधांशुजी महाराज
  • सग्रह कर्ता श्रीमती राज


--
Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 5/29/2009 04:15:00 PM

Friday, May 29, 2009

regarding address and availability of Jeewan Sanchetna

  • Subject: Re: regarding address and availability of Jeewan Sanchetna

प्रथ्वी









  • भक्त वह है जो अपना मन उस पृथ्वी के समान बना ले जिस मैं लोग विष्टा डालते हैं पर वह अन्न देती है !
  • परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
  • (संग्रह कर्ता श्रीमती राज गर्ग )

Thursday, May 28, 2009

क्रोध


  • क्रोध खत्म हो जाता है, उसका घाव खत्म नहीं होता





    एक बालक को छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आ जाता था। उसके पिता ने कहा, जब भी तुम्हें क्रोध आए, घर की चारदीवारी पर एक कील ठोक देना। पहले दिन उस लड़के ने 37 कीलें ठोकीं। लेकिन कीलें देख कर उसे खुद पर आश्चर्य भी हुआ कि उसे इतना क्रोध आता है।


    उसके अगले दिन उसने 32 कीलें ठोकीं, उसके बाद 29 । क्रोध आने के बाद जाकर दीवार में कील ठोकने की उस प्रक्रिया में कुछ सप्ताहों में उसने अपने क्रोध पर काबू पाना सीख लिया और धीरे-धीरे कीलें गाड़ने की संख्या भी कम हो गई। उसे समझ आ गया कि कील ठोकने की तुलना में क्रोध पर काबू पाना आसान है। फिर एक दिन ऐसा आ गया जब उसे बिल्कुल क्रोध नहीं आया, वह एक सहनशील बालक बन गया।

    उसने अत्यंत हर्षित भाव से पिता को इसके बारे में बताया। तब पिता ने सुझाव दिया कि अब वह प्रतिदिन एक-एक कील दीवार से बाहर निकाले, क्योंकि अब उसे अपने आप पर पूरा नियंत्रण हो गया है। इस तरह कुछ दिन बीते और एक दिन उसने खुश हो कर पिता को जा कर बताया कि सब कीलें निकाल दी गई हैं।

    पिता अपने बेटे का हाथ पकड़ कर दीवार के पास वापस ले गया। फिर कहा, तुमने बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन यह देखो, कील निकालने के बाद भी गड्ढे बचे हुए हैं। कील ठोकने से जो नुकसान होना था, वह हो चुका। दीवार अब कभी भी अपनी पहली वाली साफ-सुथरी स्थिति में नहीं आ सकती। उसने बेटे को समझाया, इसी तरह जब हम किसी को क्रोध के आवेश में कुछ अनाप-शनाप कहते हैं, तो दूसरों के मर्मस्थलों को घायल कर देते हैं। उसके बाद सुलह-सफाई हो भी जाए, तो उसके निशान रह जाते हैं। तुम किसी व्यक्ति को पहले तो घाव दे दो और फिर बार-बार 'सॉरी' कहो भी तो घाव के निशान जाएंगे नहीं, वे बने रहेंगे।

    हमारे शास्त्रों में एक नीति वाक्य है, जिसने क्रोध की अग्नि अपने हृदय में प्रज्ज्वलित कर रखी है, उसे चिता से क्या प्रयोजन? अर्थात वह तो बिना चिता के ही जल जाएगा। ऐसी महाव्याधि से दूर रहना ही कल्याणकारी है। क्रोध बुद्धि की विनाशकारी स्थिति है। वास्तव में क्रोध, घृणा, निंदा, ईर्ष्या- ये वे भावनाएं हैं जिनसे मनुष्य की तर्कशक्ति नष्ट हो जाती है। क्रोध को तो यमराज कहा गया है।

    पुत्र ने पिता की आज्ञा नहीं मानी, पिता को क्रोध आ गया। पत्नी ने आपकी मर्जी की दाल-सब्जी नहीं बनाई, तो आपको क्रोध आ गया। आप समझते हैं कि हर काम आपकी मर्जी से ही होना चाहिए। कई बार हमारे विचार दूसरों से मेल नहीं खाते, तो मतभेद हो जाता है, शत्रु बन जाते हैं। हम समझते हैं कि लोगों को हमारे अनुसार ही चलना चाहिए।

    इसी तरह जब हम यह मानने लगते हैं कि जो कुछ हम जानते हैं, वह ठीक है। तब भी संघर्ष और क्रोध के अवसर आते हैं। वैज्ञानिक लोग किसी एक बात का जीवन भर अनुसंधान करते हैं। कोई सिद्धांत निर्धारित करते हैं, किंतु यदि उन्हें अपने मन में संदेह हुआ तो बिना सालों के परिश्रम का ख्याल किए तुरंत अपना मत बदल भी देते हैं। ज्ञान का समुद्र अथाह है। जो यह सोचता है कि मैं जो जानता हूं, वही पूर्ण सत्य है, वह अंधेरे में भटक रहा है।

    जो खुद को मालिक मानता है, कर्ता समझता है, अहंकार करता है, उसे ही क्रोध आएगा, जो अपने को सेवक स्वरूप जानता है, वह किसी पर क्रोध क्यों करेगा? इसलिए हमें प्रतिदिन एकांत में बैठकर कुछ देर शांतिपूर्वक अपनी वास्तविक स्थिति के बारे में सोचना चाहिए। हमें इतना अधिकार किसी ने नहीं दिया कि सभी बातों में हम अपनी ही मर्जी चलाएं। हम भी उतना ही अधिकार रखते हैं, जितना दूसरे। फिर जब हम दूसरे से प्रतिकूल विचार रखते हैं, तो दूसरों को भी वैसा करने का अधिकार क्यों नहीं है?




    From the Desk of Yuva Kranti Dal

Tuesday, May 26, 2009

प्रार्थना

----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Tuesday, May 26, 2009 5:08 AM
Subject: [GURUVANNI] प्रार्थना




  • "प्रार्थना का मतलब हें धन्यवाद करना और उस प्रभु में अटूट विश्वास रखना। प्रार्थना में उसकी कृपा माँगिए, संसारिक वस्तुओं की सूची बनाकर उसके सामने मत रखें। वह कृपा करे तो बिन मांगे बहुत कुछ देता हें"।

    परम पूज्य सुधाशुंजी महाराज

Sunday, May 24, 2009

सूचना

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  • दीक्षित गुरुभक्तों एवं श्रद्धालुँजनों के लिए अति आवश्यक सूचना
  • सदगुरुदेव पूज्य सुधांशुजी महाराज के प्रति श्रद्घा -आस्था से भरे प्रिय भक्त बन्धुओं सम्पूर्ण विश्व में करोड़ों भक्तों के प्रिय सुधांशु जी महाराज के उदबोधन एवं सरस प्रवचन हर श्रोता के ह्रदय में सीधे ही उतरकर उसे जीवन के प्रति नै द्रष्टि ,नई सोच और सभी समस्याओं के समाधान का मार्ग देते हैं !ऐसे महान संत की अमृतवाणी सुनाने ,उनके दर्शन पाने और उनके सान्निध्य में आयोजन होने वाले आगामी विराट भक्ति सत्संग एंव समय समय पर आयोजित होने वाले एनी सामाजिक कार्यक्रमों की जानकारी घर बैठे नि:शुल्क प्राप्त करने हेतू कृपया अपना विवरण आज hee ईमेल या पत्र द्वारा अवश्य भेजें ! महाराजश्री से दीक्षित शिष्यों के लिए यह सूचना भेजना अनिवार्य है !
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  • महाराजश्री से दीक्षा ली हे या नहीं ! यदि हाँ तो कब और कहाँ ली ?--------------------------
  • मिशन के किस मंडल से जुड़े हें ?------------------------------------------
  • आप यह सब जानकारी हमें निम्नलिखित इ मेल पर अथवा पते पर दें :-
  • Email; katariadevaraj@gmail.com
  • पता : देवराज कटारिया -महामंत्री ,विश्व जाग्रति मिशन ,
  • आनंदधाम ,वक्कार्वाला मार्ग नांगलोई ,नजफगढ़ रोड दिल्ली -41
  • निवेदक :देवराज कटारिया

Wednesday, May 20, 2009

साधना शिविर मनाली



  • सिद्धसंत परमपूज्य सदगुरु
    श्री सुधांशुजी महाराज
    के पावन सानिध्य में
    देव भूमि मनाली ,हिमाचल प्रदेश स्थित साधनाधाम आश्रम में
    ध्यान - साधना शिविर
    द्वितीय शिविर :-दिनांक 5 से 8-जून ,2009
    सदगुरुदेव के चरणों ,में बैठकर ,अतल ,गहराईयों ,में ,उतरकर
    देवी,अनुभूतियों को ,प्राप्त ,करने का स्वर्णिय अवसर
    विस्तृत जानकारी हेतु सम्पर्क सूत्र :श्री आदेश गुप्ता --9311534556
    आयोजक :आनन्दधाम
    163-164,ग्राउण्ड फलोर ,पाकेट -सी-1,सेकटर -11 ,रोहिणी
    दिल्ली -85 दूरभाष -27574030
    जीवन सचेतना मई 2009

धर्म





  • व्यक्ति कोई भी कार्य करे , उसका परिणाम जरुर सोचे -यही धर्म की कसौटी है !

Tuesday, May 19, 2009

गुरुपूर्णिमा मुख्य महोत्सव

  • कार्यक्रम
    दिनांक : 3 जुलाई ,2009 शुभारम्भ साय
    दिनांक : 4-6 जुलाई ,2009 प्रात:ऐव साय
    दिनांक : 7 जुलाई ,2009 प्रात: गुरुदर्शन ,पादपूजा,आशीर्वचन ,भण्डारा
    स्थान : रोहिणी ,दिल्ली
    आयोजक आनन्दधाम
    163-164,ग्राउण्ड फ्लोर ,पाकेट-सी-1-11 ,रोहिणी ,दिल्ली,-110085
    दूभाष :27574030,9311534556
    गुरुपूर्णिमा पर देश व्यापी अन्य कार्यक्रम
    12-13 जून 2009 : पुणे,महाराष्ट्र
    14 जून 2009 :वरदान लोक आश्रम ,थाणे-मुम्बई
    20-21 जून 2009 : पंचकुला ,चण्डीगढ
    28 जून 2009 : कानपुर,उत्तर प्रदेश
    जीवन सचेतना मई 2009

अमृतवनी

ammritvani


  • अच्छा हे वह लोभ
  • जो इशभक्ति की और खींचे !
  • अच्छा हे वह मोह
  • जो गीता का ज्ञान उत्पन्न करे !
  • परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Saturday, May 16, 2009

ammritvani



  • उत्तम हे वह क्रोध
    जो दुष्टों का दलन करे !

  • अच्छी हे वह ईर्ष्या
    जो प्रितीस्पर्धा का भाव भरे !
  • अच्छा हे वह प्रतिकार
    जो आगे बढ्ने को झकझोरे!

  • अच्छी हे वह घृणा
    जो दुष्कर्मों से बचाए !


    paramapoojy shrii sudhaanshujii mahaaraaj

गुरु वाणी



  • उत्तम हे वह क्रोध
    जो दुष्टो का दलन करे !
    अच्छी हे वह ईर्ष्या
    जो प्रतिस्पर्धी का भाव भरे !
    अच्छा हे वह प्रतिकार
    जो आगे बढने को झकझोरे!
    अच्छी हे वह घ्रृर्णा
    जो दुष्कर्मों से बचाए !

  • परमपूज्य सुधांशुजी महाराज

Wednesday, May 13, 2009

Guru Purnimaa Satsang at Pune

Guru Purnimaa Satsang at Pune





  • Guru Purnimaa Satsang at Pune

  • 12-06-09 from 5-00 to 7-30 pm

  • Guru Darshan on 13-06-09 from 9-00 to 10-00am

  • From 10-00 am onward Shri Guru Puja and Ashirvachan on 13 -06-09

  • venue Shinde High school ground ,Sahakarnagar Pune

  • Contact Person

  • 1-Shri Ghanshyam zawar 09422307190

  • 2-Shri Harish Thakwani 09823015107

  • 3-Shri Jaikishan jindal 09850408319

  • 4-Shri Nischit Dharak 09870402010

  • 5-shri Madan Gopal Garga 0 9819101127