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Wednesday, April 15, 2009

संतोष से बढ्कर कोई

  • शान्ति के समान कोई तप नहीं हे !
    · • संतोष से बढ्कर कोई सुख नहीं हे !
    · • तृष्णा से बढकर कोई व्याधि नहीं हे !
    · • दया के समान कोई धर्म नहीं हे !
    · • सत्य जीवन हे और असत्य मृत्यु हे !
    · • घृणा करनी हे तो अपने दोषों से करो !
    · • लोभ करना हे तो प्रभू के स्मरण का करो !
    · • बैर करना हे तो अपने दुराचारों से करो !
    · • दूर रहना हे तो बुरे संग से रहो !
    · • मोह करना हो तो परमात्मा से करो !
    · • पुज्य सुधान्शुजी महाराज

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