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Thursday, February 25, 2010

कड़वाहट

भगवान शिव ने जब विष पीया तो उसको गले मैं रखा और इस दुनिया को कह दिया की दुनिया की कड़वाहट को पी जाना , पर कड़वाहट को पीकर गले तक ही रखना ,गले से नीचे नहीं उतरनेदेना .दिल तक नहीं पहुँचने देना .दुनिया की बातें दिल को लगाने के लिए नहीं है !अगर दिल पर लगाकर बैठ गए तो खुद का जीना मुश्किल हों जाएगा !और अगर कड़वाहट को मुख से बाहर उगल दिया तो दूसरों के लिए परेशानी खडी हों जाएगी 1

Monday, February 22, 2010

दिया

आपने दिया जला रखा था ,खिड़की खुली तेज हवा के झोके से और दीये को बुझा कर चली गई और आपको अँधेरे मैं कर दिया ! ऐसे ही आपके मन मैं कोई लहर उठी हे जो आपके अन्दर होश का दिया जल रहा था उसे बुझा कर चली जाएगी और आपको अँधेरे मैं कर देगी , फिर आप विपरीत दिशा के और चल पड़ोगे !

Sunday, February 21, 2010

इच्छा


बड़े बड़े स्वपनों के चक्करों मैं इच्छायों को इतना मत बढाओ की दुनिया के चक्कर मैं फंसते चले जाओ ! इच्छाओं के धागे मैं इतना मत उलझाओ की निकलना मुश्किल हों जाये !

Saturday, February 13, 2010

नेगेटिव अप्रोच

नेगेटिव अप्रोच मत रखो जैसे
मैं कुछ नहीं कर सकता ! अब हों ही नहीं पाएगा ! मेरी तो जिन्दगी भी ठीक नहीं हे ,मेरा तो परिवार भी ठीक ही नहीं हे ! मेरा तो साथ देने वाला भी कोई नहीं हे मरी तो सेहत भी ठीक नहीं हे और मेरे तो परिवार की स्थिंति भी ठीक नहीं हे मेरे पास पैसे भी नहीं हें ,मेरे तो नक्षत्र भी ठीक नहीं हें और मैं तो पहले हे इस हालत मैं पहुँच चुका हूँ अब कुच्छ अच्छा होने वाला नहीं हे !

Thursday, February 11, 2010

मन

मन के आदत हे पिसे को और पीसता रहता हे और जब आटा पिसते पिसते ख़तम हों जाता हे तो फिर वह हम को पीसता हे !
पूज्य सुधान्शुजी महाराज
के टी वी प्रवचन से