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Tuesday, January 26, 2010

शरीर मैं विकार क्यों पैदा होते हें

  • रोग के प्रमुख कारण विकार पैदा होना हे ......
  • स्वाद के लालच मैं ठूंस ठूंस कर खाना !
  • बिना भूक लगे खाना !
  • पहला भोजन पचे बिना फिर खाना !
  • पौष्टिक व् सन्तुलित आहार की कमी !
  • गरिष्ट व् अधिक तला - भुना खाना - खाना !
  • उत्तेजक व् नशीले पधार्थों का सेवन !
  • भोजन के साथ अधिक पानी पीना !
  • चबा चबा कर न खाना !
  • अशांत मन और जल्दी मैं भोजन करना !
  • रात को भोजन कर तुरन्त सो जाना !
  • सारा दिन कुछ न कुछ खाते रहना ,लगातार ऐसा करने से भोजन पचता नहीं हे ,
  • मेदा बिगड़ जाता हे और मल बहार नहीं निकलता ,जमा होकर सड़ने लगता ,
  • हे और विकार बन जाता हे जिससे विभिन प्रकार के रोग उत्तपन होते हें !
  • धर्मदूत जनवरी २०१०

गुरु और गुरुमा


Sunday, January 10, 2010

AMRIT VANI] तर्क और प्यार

----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Sunday, January 10, 2010 9:01 AM
Subject: [Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ki AMRIT VANI] तर्क और प्यार


तर्क कर लेना भली बात हें पर उसको तकरार में मत् बदल लेना !
जितना त्याग होगा उतना प्यार गहरा होगा ,त्यागी बनो प्यार अपने आप होजाएगा
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

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Posted By Madan Gopal Garga to Param Pujay SUDHANSHUJI Maharaj ki AMRIT VANI at 1/10/2010 08:57:00 AM

Tuesday, January 5, 2010

गृहस्थ आश्रम के ३१ वर्ष सम्पन्न होने पर बधाई


परम श्रद्धेय सदगुरुदेव जी एवं परम पूज्या गुरुमाता जी को

गुरुभाक्तों के ओर से बधाई !

परम श्रद्धेय सदगुरु श्रीसुधांशुजी महाराज एवं परम आदरणीया

गुरुमाता श्रीमती ऋचासुधांशुजी के गृहस्थ आश्रम के ३१ वर्ष सम्पन्न

होने पर समस्त भक्तजनों की गुरुचरणों मैं हार्दिक शुभकामनाएं !

शत शत नमन एवं अभिनन्दन

१४ जनवरी मकर संक्रान्ति उतरायण का पावन पर्व गुरुदेव -गुरुमां

के ग्रहस्थ प्रवेश की मंगलमयी मधुर समृति है ! सभी भक्तजनों को

इस मंगल पर्व की लाख-लाख बधाई !
जीवन संचेतना जनवरी २०१०